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अन्नप्राशन मुहूर्त 2024

जीवन के शुभ आरंभ के लिए मंगलमय तिथियाँ

जनवरी 2024

3 शुभ दिन

सो
मं
बु
गु
शु
1
2
3
4
5
6
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8
9
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16
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28
29
30
31
सर्वोत्तम दिनशुभ

शुक्रवार, 12 जनवरी 2024

सर्वाधिक शुभ

मुहूर्त समय

श्रेष्ठ मुहूर्त16:2417:43
दिन का सबसे लंबा शुभ मुहूर्त1 घं 19 मि
शुभ मुहूर्त14:2315:06
इस दिन का एक और शुभ मुहूर्त43 मि
नक्षत्र
उत्तर आषाढ़ा
तिथि
शुक्ल द्वितीया
योग
वज्र
करण
बालव

यह दिन क्यों शुभ

  • उत्तर आषाढ़ा — इस संस्कार हेतु शुभ नक्षत्र
  • श्रवण — इस संस्कार हेतु शुभ नक्षत्र
  • शुक्ल द्वितीया — अनुकूल तिथि
  • अभिजित मुहूर्त — मध्याह्न का 'विजय' काल

वर्जित समय

  • राहु काल11:10–12:29
  • यमगण्ड15:06–16:24
  • गुलिक काल08:33–09:52
  • वर्ज्यम्00:51–02:18
दिन का चौघड़िया देखें

35 शुभ दिन

2024 में सर्वाधिक शुभ अन्नप्राशन तिथियाँ।

जनवरी2024

3 शुभ दिन
  1. 12
  2. 15
  3. 17

फ़रवरी2024

5 शुभ दिन
  1. 12
  2. 14
  3. 19

    सोमवार, 19 फ़रवरी 2024

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त06:56 – 08:2109:45 – 10:32
    मृगशिराशुक्ल दशमीअमृत सिद्धि योगसर्वार्थ सिद्धि योगदिन का चौघड़िया देखें
  4. 21
  5. 22

    गुरुवार, 22 फ़रवरी 2024

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त08:19 – 09:4411:09 – 13:22
    पुष्यशुक्ल त्रयोदशीअमृत सिद्धि योगसर्वार्थ सिद्धि योगगुरु पुष्य योगदिन का चौघड़िया देखें

मार्च2024

1 शुभ दिन
  1. 11

अप्रैल2024

2 शुभ दिन
  1. 12
  2. 15

मई2024

2 शुभ दिन
  1. 9
  2. 10

जून2024

4 शुभ दिन
  1. 10
  2. 17
  3. 19
  4. 20

जुलाई2024

3 शुभ दिन
  1. 8
  2. 12
  3. 17

    बुधवार, 17 जुलाई 2024

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त05:34 – 06:23
    अनुराधाशुक्ल एकादशीअमृत सिद्धि योगसर्वार्थ सिद्धि योगदिन का चौघड़िया देखें

अगस्त2024

3 शुभ दिन
  1. 9
  2. 12
  3. 14

    बुधवार, 14 अगस्त 2024

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त10:24 – 10:46
    अनुराधाशुक्ल दशमीअमृत सिद्धि योगसर्वार्थ सिद्धि योगदिन का चौघड़िया देखें

सितंबर2024

4 शुभ दिन
  1. 4
  2. 5
  3. 6
  4. 16

अक्टूबर2024

1 शुभ दिन
  1. 7

    सोमवार, 7 अक्टूबर 2024

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त09:48 – 10:4012:08 – 13:3615:04 – 17:59
    अनुराधाशुक्ल पंचमीसर्वार्थ सिद्धि योगदिन का चौघड़िया देखें

नवंबर2024

4 शुभ दिन
  1. 4
  2. 11
  3. 13
  4. 14

    गुरुवार, 14 नवंबर 2024

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त08:03 – 09:24
    अश्विनीशुक्ल त्रयोदशीसर्वार्थ सिद्धि योगदिन का चौघड़िया देखें

दिसंबर2024

3 शुभ दिन
  1. 5
  2. 6
  3. 11

अन्नप्राशन मुहूर्त के बारे में

अन्नप्राशन शिशु को पहला अन्न देने का संस्कार है — परंपरागत रूप से बालकों के लिए सम माह (छठा या आठवाँ) और बालिकाओं के लिए विषम माह (पाँचवाँ या सातवाँ) में। यह सौम्य नक्षत्र-समूह पर, शुक्ल पक्ष में, दिन के समय होता है, और इस पर कोई ऋतु-विराम नहीं — अतः हर महीने उपयुक्त तिथियाँ मिलती हैं।

अन्नप्राशन मुहूर्त की तिथियाँ कैसे चुनी जाती हैं

  • अन्नप्राशन नामकरण वाला ही सोलह 'सौम्य' नक्षत्रों का समूह लेता है — लघु, मृदु, चर व ध्रुव गण — और बाल संस्कारों पर पंचक लागू नहीं होता।
  • यह शुक्ल पक्ष में, शास्त्रीय शुभ तिथियों — द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी व त्रयोदशी; द्वादशी शास्त्रानुसार वर्जित — पर, सौम्य वारों (सोम, बुध, गुरु, शुक्र) में, दिन के समय होता है।
  • परंपरा इसे शिशु की आयु से जोड़ती है — बालकों के लिए सम माह (छठा या आठवाँ), बालिकाओं के लिए विषम माह (पाँचवाँ या सातवाँ) — और कोई ऋतु-विराम लागू नहीं, अतः तिथियाँ वर्ष भर मिलती हैं। शास्त्र यहाँ अस्त-नियम तक शिथिल करते हैं: अन्नप्राशन माह-प्रधान संस्कार है।
  • मानक फ़िल्टर — रिक्ता तिथि, अमावस्या, भद्रा व अशुभ योग — सर्वत्र की तरह यहाँ भी लागू हैं।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • तिथियाँ नई दिल्ली (IST) हेतु गणना की गई हैं। अन्य शहरों में समय थोड़ा बदलता है।
  • पंचांग के पाँचों अंग एक साथ तौले जाते हैं — दिन तभी प्रबल होता है जब शुभ नक्षत्र के साथ शुभ तिथि और सौम्य वार भी हो।
  • अभिजित मुहूर्त — मध्याह्न (सौर दोपहर) के आसपास का ~48 मिनट का समय — सर्वत्र शुभ माना जाता है, और गृह प्रवेश व भूमि पूजन के मुहूर्त में श्रेष्ठ समय के रूप में दर्शाया गया है।
  • राहु काल, यमगण्ड व गुलिक काल दैनिक अशुभ अवधियाँ हैं; सूचीबद्ध तिथि पर भी वास्तविक कार्य इनसे बाहर आरंभ करें।
  • खरमास / मलमास — जब सूर्य धनु (मध्य दिसंबर→मध्य जनवरी) या मीन (मध्य मार्च→मध्य अप्रैल) में रहता है — विवाह व बड़े शुभ कार्य रुक जाते हैं।
  • चातुर्मास — देवशयनी से प्रबोधिनी एकादशी तक — विवाह, गृह प्रवेश व कई संस्कार स्थगित रहते हैं।
  • अधिक मास (मलमास) में शुभ कार्य परंपरागत रूप से स्थगित रहते हैं, अतः कुछ महीनों में बहुत कम या कोई तिथि नहीं दिखती।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अन्नप्राशन कब होता है?
जब शिशु को पहला अन्न दिया जाता है — परंपरागत रूप से बालकों के लिए सम माह (छठा या आठवाँ) और बालिकाओं के लिए विषम माह (पाँचवाँ या सातवाँ) में।
क्या किसी ऋतु में अन्नप्राशन वर्जित है?
नहीं। विवाह या मुंडन के विपरीत इस पर खरमास या चातुर्मास का कोई विराम नहीं, अतः हर महीने उपयुक्त तिथियाँ मिलती हैं — संस्कार शिशु की आयु से चलता है और कैलेंडर में सदा निकट का दिन उपलब्ध रहता है।
अन्नप्राशन शुक्ल पक्ष में ही क्यों?
बढ़ता चंद्रमा वृद्धि व पोषण का प्रतीक है — पहले अन्न के अनुरूप। इसलिए तिथियाँ केवल बढ़ते पखवाड़े में, अमावस्या से पूर्णिमा के बीच, सूचीबद्ध हैं।
पहला अन्न दिन में किस समय दें?
सूचीबद्ध तिथि के दिन के निर्दोष समय में — राहु काल, यमगण्ड व गुलिक काल से बाहर; प्रत्येक कार्ड पर दिखाया गया समय इन्हें पहले से ही हटाकर दिया गया है।
ये मुहूर्त तिथियाँ कैसे निकाली जाती हैं?
प्रत्येक दिन को उसके दृक-पंचांग के पाँच अंगों — तिथि, वार, नक्षत्र, योग व करण — के आधार पर, मुहूर्त चिंतामणि, कालप्रकाशिका व बी.वी. रमन की 'मुहूर्त' की शास्त्रीय परंपरा अनुसार अंक दिए जाते हैं। फिर दोषयुक्त दिन (अमावस्या, रिक्ता तिथि, भद्रा या पंचक) हटा दिए जाते हैं, और नई दिल्ली हेतु केवल शुभ तिथियाँ शेष रहती हैं।
क्या ये समय मेरे शहर के लिए मान्य हैं?
तिथियाँ नई दिल्ली (IST) पर आधारित हैं। शुभ दिन प्रायः पूरे भारत में समान रहता है, पर सूर्योदय-आधारित समय — तथा राहु काल व अभिजित जैसी अवधियाँ — स्थान अनुसार थोड़ा बदलते हैं, अतः समय तय करने से पूर्व अपने शहर का पूरा पंचांग देखें।
कुछ महीनों में कोई तिथि क्यों नहीं होती?
कठोर नियम अशुभ तिथियों व नक्षत्रों को हटा देते हैं, और ऋतु-विराम — खरमास (मलमास), चातुर्मास व अधिक मास — बड़े शुभ कार्यों को पूर्णतः रोक देते हैं। इन अवधियों में पड़ने वाले महीने में कम या कोई तिथि न दिखना स्वाभाविक है।
अभिजित मुहूर्त क्या है?
अभिजित स्थानीय मध्याह्न (सौर दोपहर) के आसपास का लगभग 48 मिनट का समय है, जिसके स्वामी भगवान विष्णु हैं और जो लगभग हर कार्य हेतु शुभ माना जाता है। मुहूर्त ग्रंथ इसे 'विजय' काल मानते हैं, और हम इसे गृह प्रवेश व भूमि पूजन के मुहूर्त में श्रेष्ठ समय के रूप में दर्शाते हैं।
भद्रा, पंचक व रिक्ता तिथि क्या हैं?
ये वे शास्त्रीय दोष हैं जिन्हें हम हटाते हैं। भद्रा (विष्टि करण) व पंचक (अंतिम पाँच नक्षत्रों — धनिष्ठा से रेवती — में चंद्रमा) अशुभ अवधियाँ हैं; रिक्ता तिथियाँ — प्रत्येक पक्ष की चतुर्थी, नवमी व चतुर्दशी — नए आरंभ हेतु वर्जित 'रिक्त' तिथियाँ हैं।
क्या फिर भी ज्योतिषी से परामर्श करना चाहिए?
हाँ। ये तिथियाँ शास्त्रीय नियमों पर आधारित एक सशक्त सूची हैं, पर ये एक सामान्य कुंडली हेतु निकाली गई हैं। विवाह या किसी बड़े आयोजन हेतु अपनी जन्मकुंडली से मुहूर्त का मिलान कर ज्योतिषी से पुष्टि करना उचित है।