- नई कार या बाइक खरीदने के लिए सबसे अच्छा दिन कौन सा है?
- जिस दिन का नक्षत्र लघु, मृदु या चर हो — खरीद हेतु पुष्य सर्वश्रेष्ठ है — और वार मान्य हो (रवि, सोम, बुध, गुरु या शुक्र); मंगलवार व शनिवार वर्जित। डिलीवरी शुभ चौघड़िये — अमृत, शुभ, लाभ या चल — में लें।
- चौघड़िया क्या है और यहाँ क्यों महत्त्वपूर्ण है?
- चौघड़िया दिन को लगभग 90-90 मिनट के आठ खंडों में बाँटता है, हर खंड का एक ग्रह-स्वामी होता है। यह खरीद व यात्रा के समय-निर्धारण का पारंपरिक साधन है; यहाँ दिया गया प्रत्येक समय पहले से ही चार शुभ खंडों — अमृत, शुभ, लाभ व चल — तक सीमित है, अतः उसे सीधे उपयोग किया जा सकता है।
- क्या पंचक में वाहन खरीद सकते हैं?
- हाँ — पंचक दोष निर्माण, ईंधन-संग्रह, शय्या-निर्माण व दक्षिण दिशा की यात्रा पर लागू होता है, वाहन खरीद पर नहीं। अतः धनिष्ठा से रेवती तक के दिन अन्य कारक शुभ होने पर रखे गए हैं।
- क्या किसी ऋतु में वाहन खरीद वर्जित है?
- नहीं। विवाह या गृह प्रवेश के विपरीत वाहन पर खरमास या चातुर्मास का कोई विराम लागू नहीं होता, अतः वर्ष के हर महीने में शुभ तिथियाँ मिलती हैं।
- विजयादशमी मंगलवार को पड़े तो भी सूचीबद्ध क्यों?
- क्योंकि उस दिन को वार नहीं, पर्व सिद्ध करता है। धर्मसिंधु कहती है कि विजयादशमी के कार्य 'मुहूर्त, तारा बल या चंद्र बल की अपेक्षा बिना' शुभ होते हैं — पर्व परंपरा दिन निश्चित करती है, और केवल दिन के भीतर के त्याज्य काल (राहु काल, भद्रा) समय को आकार देते हैं। पर्व के प्रमाण से सूचीबद्ध तिथियाँ उसके नाम का चिह्न धारण करती हैं।
- ये मुहूर्त तिथियाँ कैसे निकाली जाती हैं?
- प्रत्येक दिन को उसके दृक-पंचांग के पाँच अंगों — तिथि, वार, नक्षत्र, योग व करण — के आधार पर, मुहूर्त चिंतामणि, कालप्रकाशिका व बी.वी. रमन की 'मुहूर्त' की शास्त्रीय परंपरा अनुसार अंक दिए जाते हैं। फिर दोषयुक्त दिन (अमावस्या, रिक्ता तिथि, भद्रा या पंचक) हटा दिए जाते हैं, और नई दिल्ली हेतु केवल शुभ तिथियाँ शेष रहती हैं।
- क्या ये समय मेरे शहर के लिए मान्य हैं?
- तिथियाँ नई दिल्ली (IST) पर आधारित हैं। शुभ दिन प्रायः पूरे भारत में समान रहता है, पर सूर्योदय-आधारित समय — तथा राहु काल व अभिजित जैसी अवधियाँ — स्थान अनुसार थोड़ा बदलते हैं, अतः समय तय करने से पूर्व अपने शहर का पूरा पंचांग देखें।
- कुछ महीनों में कोई तिथि क्यों नहीं होती?
- कठोर नियम अशुभ तिथियों व नक्षत्रों को हटा देते हैं, और ऋतु-विराम — खरमास (मलमास), चातुर्मास व अधिक मास — बड़े शुभ कार्यों को पूर्णतः रोक देते हैं। इन अवधियों में पड़ने वाले महीने में कम या कोई तिथि न दिखना स्वाभाविक है।
- अभिजित मुहूर्त क्या है?
- अभिजित स्थानीय मध्याह्न (सौर दोपहर) के आसपास का लगभग 48 मिनट का समय है, जिसके स्वामी भगवान विष्णु हैं और जो लगभग हर कार्य हेतु शुभ माना जाता है। मुहूर्त ग्रंथ इसे 'विजय' काल मानते हैं, और हम इसे गृह प्रवेश व भूमि पूजन के मुहूर्त में श्रेष्ठ समय के रूप में दर्शाते हैं।
- भद्रा, पंचक व रिक्ता तिथि क्या हैं?
- ये वे शास्त्रीय दोष हैं जिन्हें हम हटाते हैं। भद्रा (विष्टि करण) व पंचक (अंतिम पाँच नक्षत्रों — धनिष्ठा से रेवती — में चंद्रमा) अशुभ अवधियाँ हैं; रिक्ता तिथियाँ — प्रत्येक पक्ष की चतुर्थी, नवमी व चतुर्दशी — नए आरंभ हेतु वर्जित 'रिक्त' तिथियाँ हैं।
- क्या फिर भी ज्योतिषी से परामर्श करना चाहिए?
- हाँ। ये तिथियाँ शास्त्रीय नियमों पर आधारित एक सशक्त सूची हैं, पर ये एक सामान्य कुंडली हेतु निकाली गई हैं। विवाह या किसी बड़े आयोजन हेतु अपनी जन्मकुंडली से मुहूर्त का मिलान कर ज्योतिषी से पुष्टि करना उचित है।